Tuesday, December 27, 2011

हमहूँ अब चुनाव लड़ब



छोट मोट धंधा से छोट कमाई होखेला
खूब पईसा औ नाम कमाइब हमहूँ अब चुनाव लड़ब

जालसाजी अऊर ठेकेदारी से कतना कमाल करब
बड़ा घोटाला कइके अब लाखन के व्यापार करब
खूब पुलिस के धमकी से थाना में परसाद चढ़इनी
अब उनसे आपन सेवा करबाईब
हमहूँ अब चुनाव लड़ब


घर फोन बिजली पानी के खर्चा ता मुफ्त रही
हमरो खाता स्विस बैंक में कर के झंझट से मुक्त रही
दुनिया भर के सुख मिली नौकर चाकर के रहला से
रेल टिकट के खर्च बचाइब
हमहूँ अब चुनाव लड़ब

हम गलत करीं चाहे सही करीं हमरा के ओसे मतलब का
जनता भिरी तबे तक जाईब जब तक उनसे मतलब बा
वृद्धा पेंसन, रोजगार गारंटी में घर वालन के नाम जोड़ाइब
जतना संभव भ्रष्ट हो जाइब
हमहूँ अब चुनाव लड़ब

नारी: एक परिचय

परिचय मेरा क्या है
पता नहीं कि कौन हूँ मैं 

गहरी सरिता सी कभी कभी
मैं धीरज और विश्वास भरी 
कभी मचलती लहरों सी
मैं अल्हड़ और उन्माद भरी 
आश्वस्त भी अनजान भी
रिक्त भी ऊफान भी 
दो अलग अलग पहचान लिए 
पता नहीं कि कौन हूँ मैं
 
गुजरे हुए ज़माने की
यादें या परछाई हूँ 
कभी रोशनी से रोशन
कभी अंधियारे से घबरायी हूँ 
नेता भी मैं आवाम मैं
शुरुआत मैं अंजाम मैं 
साहिल कभी मझधार मैं 
पता नहीं कि कौन हूँ मैं 

अधखिले पुष्प की कोमल अभिलाषा 
मैं नीर भरे नैनों की गाथा  
कभी प्रचंड ज्वाला सी हूँ
कभी तिमिर में लौ सी आशा 
इस पार मैं उस पार मैं 
अपना स्वयं आधार मैं
मैं अस्तित्व तलाशती नारी
पता नहीं कि कौन हूँ मैं