परिचय मेरा क्या है
पता नहीं कि कौन हूँ मैं
गहरी सरिता सी कभी कभी
मैं धीरज और विश्वास भरी
कभी मचलती लहरों सी
मैं अल्हड़ और उन्माद भरी
आश्वस्त भी अनजान भी
रिक्त भी ऊफान भी
दो अलग अलग पहचान लिए
पता नहीं कि कौन हूँ मैं
गुजरे हुए ज़माने की
यादें या परछाई हूँ
कभी रोशनी से रोशन
कभी अंधियारे से घबरायी हूँ
नेता भी मैं आवाम मैं
शुरुआत मैं अंजाम मैं
साहिल कभी मझधार मैं
पता नहीं कि कौन हूँ मैं
अधखिले पुष्प की कोमल अभिलाषा
मैं नीर भरे नैनों की गाथा
कभी प्रचंड ज्वाला सी हूँ
कभी तिमिर में लौ सी आशा
इस पार मैं उस पार मैं
अपना स्वयं आधार मैं
मैं अस्तित्व तलाशती नारी
पता नहीं कि कौन हूँ मैं
No words for compliment
ReplyDeleteJai ho
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