एक अनजान राह पे सफ़र सी होती हैं बेटियां,
खुद के ही नहीं औरों के भी गम में रोती हैं बेटियां |
कितना भी हसीं ख्वाब हो टूटने के डर से,
जिंदा रह के भी जैसे ज़िन्दगी को खोती हैं बेटियां |
इस ओर भी बंदिश है उस ओर भी बंधन है,
इस दौर में भी बेटों से छोटी हैं बेटियां |
किसी घर की चहल आज हैं कल इज्जत किसी घर की,
एक संसार में ही रह के कई जीवन संजोती हैं बेटियां |
पिता के चेहरे की रौनक माँ की हमदर्द भी होती हैं,
हर हाल में जीती हैं खुश होती हैं बेटियां |
बहनों के लिए सीख भाई के लिए फ़र्ज़
हर इबादत में ऊपर, अनमोल होती हैं बेटियां |
हर अश्क संभालो एक सैलाब बना डालो,
'रश्मि' खजाने से कम नहीं मोती हैं बेटियां |
bahut dardnak hai...................
ReplyDeletebhalo likhe chho. Emotional but grt.