Saturday, March 5, 2011

बेटियां

एक अनजान राह पे  सफ़र सी होती हैं  बेटियां,
खुद के ही नहीं औरों के भी गम में रोती हैं बेटियां |

कितना भी हसीं ख्वाब हो टूटने के डर से,
जिंदा रह के भी जैसे ज़िन्दगी को खोती हैं बेटियां |

इस ओर भी बंदिश है उस ओर भी बंधन है,
इस  दौर में भी बेटों से छोटी  हैं बेटियां |

किसी घर की चहल आज हैं कल इज्जत किसी घर की,
एक संसार में ही रह के कई जीवन संजोती हैं बेटियां |

पिता के चेहरे की रौनक माँ की हमदर्द भी होती हैं,
हर हाल  में जीती  हैं खुश  होती हैं बेटियां |

बहनों के लिए सीख भाई के लिए फ़र्ज़
हर इबादत में ऊपर, अनमोल होती हैं बेटियां |

हर अश्क संभालो एक सैलाब बना डालो,
'रश्मि' खजाने से कम नहीं मोती हैं बेटियां |

1 comment:

  1. bahut dardnak hai...................


    bhalo likhe chho. Emotional but grt.

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