खुद के दुःख से दिल बहलाना पीने वाले ही जानें
गिर गिर के फिर से उठ जाना पीने वाले ही जानें
जहाँ की हर जिल्लत को अनसुन अनदेखा कर जाना
हर तोहमत को शौक बनाना पीने वाले ही जानें
कुछ पाने और कुछ खोने का इनको अरमान कहाँ
छुपे मर्म का पता ठिकाना पीने वाले ही जानें
घर के झगड़ों क्लेश कलह में अनजाने ही पिस जाना
सुबह अलग रातें दुहराना पीने वाले ही जानें
मस्ती की जिस दुनिया में ये मस्ताने जीते हैं
उस दुनिया का असल फ़साना पीने वाले ही जानें
बोतल की हर एक बूँद से नयी कहानी बनती है
कैसे हर गम नया बहाना पीने वाले ही जानें
होश न हो पर अपनों से दगा नहीं करते मस्ताने
पीने वालों का साथ निभाना पीने वाले ही जाने
Pine walo par research kiya .......ya phir pina start..........
ReplyDeleteJoke tha.......
un logo k bare me likhna jinhe samaj me hamesha buri nazro se dekha jata hai..wo bhi itni sachhai se....amazing..
ReplyDeleteबहुत खूब, सुन्दर अभिव्यक्ति... रचना के लिए बधाई..
ReplyDeleteदो पंक्तियाँ मेरी तरफ से-
मन्दिर भी है, मस्जिद भी हैं दुनिया के ये मयखाने
मय की भक्ति में कैसी रमता ये पीने वाले ही जाने |